भगवान राम की वंशावली और पूर्वजों के नाम

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भगवान श्री राम की वंशावली

भगवान राम:- भगवान राम की वंशावली एक ऐसा संकलन है जिसका स्रोत हमार धार्मिक जैसे बाल्मीकि रामायण तुलसीदास जी द्वारा लिखित रामचरितमानस ओर अन्य धार्मिक ग्रंथ हैं, जिनके बारे मे प्रभु श्रीराम के जीवन काल एवं चरित्र का वर्णन किया गया है , इन स्रोतों से आज से पहले की श्रीराम की वंशावली निकाल पाए हैं ।

हाल ही में चर्चित अयोध्या मंदिर विवाद के फैसला आने के बाद भगवान राम के जन्म की बातें प्रासंगिक हो गई हैं कई ऐसे सबूत है जो श्रीराम के इस धरती पर रहने की पुष्टि करते हैं हालांकि कांग्रेस के समय में राहुल गांधी ने भगवान राम को एक मिथकीय और काल्पनिक पात्र साबित करने की पूरी कोशिश की थी और उन्होंने भारत और श्रीलंका के बीच श्री राम सेतु को गिराने की भी कोशिश की थी और संसद भवन में राम को एक काल्पनिक पात्र बताया था

अब जबकि अयोध्या मंदिर विवाद पूरी तरह निपट चुका है और भगवान राम जन्मभूमि को भारत सरकार को सौंप दिया गया है ताकि भारत सरकार वहां भगवान श्री राम का एक भव्य मंदिर का निर्माण कर सके

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कल अदालत में भगवान राम के कई सबूतों पर चर्चा हुई और भगवान राम की वंशावली के बारे में भी चर्चा की गई हम यहां पर आपको भगवान श्री राम की वंशावली के बारे में बता रहे हैं जिसे रघुवंशी वंशावली भी कहा जा सकता है, इस वंशावली का स्रोत हमारे धार्मिक ग्रंथ हैं, जिनमे भगवान श्री राम के पूर्वजों के नामों की चर्चा की गई है।

तुलसीदास ने रामचरितमानस के ‘बालकाण्ड’ के प्रथम श्लोक से सातवें श्लोक तक इस बात को लिखा हैं कि राम एक पौराणिक पुरुष हैं इसका उल्लेख रामचरितमानस में मिलता है।

निम्नलिखित श्लोक जो रामचरितमानस के बालकांड के प्रथम श्लोक से सातवें में श्लोक में है जिसमें तुलसीदास जी ने राम के एक पौराणिक पुरुष होने का उल्लेख किया है

बाल काण्ड श्री रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास जी

नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा-भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति।।7।।

जिसका अर्थ है कि, अनेक पुराण, वेद और (तंत्र) शास्त्र से सम्मत तथा जो रामायण में वर्णित है और कुछ अन्यत्र से भी उपलब्ध श्री रघुनाथजी की कथा को तुलसीदास अपने अन्तःकरण के सुख के लिए अत्यन्त मनोहर भाषा रचना में विस्तृत करता है॥7॥

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राम इक्ष्वाकु वंश के थे और इस वंश के गुरु वशिष्ठ जी थे जिन्होंने इस प्रकार श्री राम की वंशावली का वर्णन किया।

ब्रह्मा जी से मरीचि का जन्म हुआ। मरीचि के पुत्र कश्यप थे। कश्यप के पुत्र विवस्वान हुए, विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए और वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु।

इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि थे।
कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था।
विकुक्षि के पुत्र बाण
बाण के पुत्र अनरण्य हुये।
अनरण्य से पृथु
पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ था
त्रिशंकु के पुत्र धुन्धुमार
धुन्धुमार के पुत्र युवनाश्व हुए
युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुये और
मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ।
सुसन्धि के दो पुत्र हुये- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित।
ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुये।
भरत के पुत्र असित हुये और
असित के पुत्र सगर हुये।
सगर के पुत्र का नाम असमञ्ज था।
असमञ्ज के पुत्र अंशुमान
अंशुमान के पुत्र दिलीप हुये।
दिलीप के पुत्र भगीरथ हुये
भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ
ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुये।

रघु बहुत पराक्रमी और तेजस्वी राजा थे और उनका प्रताप अत्यधिक था जिसकी वजह से इस वंश का नाम रघुवंश पड़ा।

भगवान राम की वंशावली और पूर्वजों के नाम


रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुये
प्रवृद्ध के पुत्र शंखण
शंखण के पुत्र सुदर्शन हुये।
सुदर्शन के पुत्र अग्निवर्ण
अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग
शीघ्रग के पुत्र मरु
मरु के पुत्र प्रशुश्रुक
प्रशुश्रुक के पुत्र का नाम अम्बरीश ।
अम्बरीश के पुत्र का नाम नहुष
नहुष के पुत्र ययाति
ययाति के पुत्र नाभाग
नाभाग के पुत्र का नाम अज
अज के पुत्र दशरथ
राजा दशरथ के चार पुत्र हुए श्री रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न।
श्री रामचंद्र के दो पुत्र लव और कुश हुए।

भगवान राम की वंशावली और पूर्वजों के नाम
भगवान राम की वंशावली और पूर्वजों के नाम

लव और कुश के आगे की भी वंशावली अलग-अलग लोगों के पास उपलब्ध है जिसके प्रमाणिकता अभी प्रासंगिक नहीं हालांकि राजस्थान में कुछ परिवार और ऐसे हैं जो खुद को श्री राम के वंशज होने का दावा करते हैं

किस तरह हुई अयोध्या की स्थापना

भगवान श्री राम के वंश को अलग-अलग नामों जैसे रघुकुल, इक्ष्वाकु और चंद्रवंशी जैसे नामों से बताया जाता है रघुकुल राजा रघु के नाम की वजह से हुआ क्योंकि वह एक बहुत ही पराक्रमी राजा साबित हुए आगे की पीढ़ियों में राजा इंक्ष्वकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस तरह अयोध्या की स्थापना हुई

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