Parshuram Jayanti 2020: के बारे में जानिए

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Parshuram Jayanti 2020: के बारे में जानिए

Parshuram Jayanti 2020:-परशुराम जयंती 2020 आज 25 अप्रैल पुरे देश में को मनाया जा रहा है। भगवान विष्णु के अवतार परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लिए थे।

Parshuram Jayanti 2020। परशुराम जयंती।

भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ था। इस तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व भी मनाया जाता है। भगवान परशुराम विष्णु भगवान के छठे अवतार हैं, भगवान परशुराम की जन्म दिवस को हम परशुराम जयंती के तौर पर मनाते हैं। कलयुग में आज भी ऐसे 8 चिरंजीवी देवता और महापुरुष है जो जीवित हैं, इन 8 चिरंजीयों में एक भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम भी हैं। अक्षय तृतीया के दिन ही इनके जयंती मनाई जाती है।

भगवान शिव के परम भक्त परशुराम न्याय के देवता हैं

भगवान शिव के परम भक्त परशुराम को न्याय का देवता कहा जाता है , उन्होंने 21 बार इस धरती को क्षत्रिय रहित किया था। यही नहीं इनके क्रोध से भगवान गणेश भी नहीं बच पाए थे। परशुराम ने अपने फरसे से वर करके भगवान गणेश के 1 दांत को तोड़ दिया था जिसके कारण से भगवान गणेश एकदंत कहलाए जाते हैं। मछायपुरण के अनुसार इस दिन जो कुछ दान किया जाता है वह अच्छा जाता है, यानी कि इस दिन का दान का कभी भी व्यर्थ नहीं होता है।

Parshuram Jayanti
image source : wikipedia

शतियो का प्रारब्ध अक्षय तृतीया से ही माना जाता है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म भृगु श्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा संपन्न प्रोतेस्ती यज्ञ से प्रसन्न देवराज इंद्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के घर में वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ था। वह भगवान विष्णु के आवेसा अवतार माने जाते हैं। पितामह भृगु द्वारा संपन्न नामकरण संस्कार के अनंतर राम और जन्मदग्नी का पुत्र होने के कारण जमदिग्ने और शिव जी द्वारा प्रदत फर्शु धारण किए रहने के कारण वह परशुराम कहलाए।

परशुराम जी का उल्लेख रामायण, महाभारत, भागवत पुराण तथा की ग्रंथों मे किया गया है

परशुराम जी का उल्लेख रामायण में महाभारत, भागवत पुराण और कल्किता पुराण इत्यादि अनेक ग्रंथों में किया गया है। वे अहंकारी और द्रूस्ट हैवेय वंसी क्षत्रियों का पृथ्वी से 21 बार संघार करने के लिए प्रसिद्ध हैं। वे धरती पर वैदिक संस्कृति का प्रचार प्रसार करना चाहते थे। कहा जाता है की भारत के अधिकांश ग्राम उन्हीं के द्वारा बसाया गया है जिसमें कोंकणा, गोवा एवं केरला का समावेश है।

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान परशुराम ने तीर चला कर गुजरात से लेकर केरला तक समुंद्र को पीछे धकेल ते हुए नए भूमि का निर्माण किया और इसी कारण कोंकण गोवा और केरला में भगवान परशुराम वंदनीय हैं, अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम का जन्म हुआ था अक्षय तृतीया को पुण्य फल प्रदान करने वाला पर्व कहते हैं। पूरे साल में कोई भी तिथि अक्षय हो सकती है, लेकिन वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय का कभी छह नहीं होता इस कारण से इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है इसे सौभाग्य से स्त्री दिवस भी करते हैं इस दिन महिलाएं परिवार को समृद्धि के लिए विशेष व्रत भी रखती हैं।

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