ओम ध्वनि।Om Sound: सूर्य से ॐ की ध्वनि निकल रही है

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ओम ध्वनि, Om Sound, ॐ की ध्वनि
ओम ध्वनि।Om Sound: सूर्य से ॐ की ध्वनि निकल रही है

ओम ध्वनि:- यह श्रद्धा और विश्वास की बात नहीं बल्कि शत प्रति सत्य और विज्ञानिक शोध पर आधारित तथ्य है , जो हमारे ऋषिओं के हजारों साल पुराने कहे गए वचनों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है ,उन्होंने कहा था कि ब्रह्माण्ड की उत्पति के समय जो ध्वनि निकली थी वह ॐ ही थी , चूँकि सूर्य ब्रह्माण्ड का एक ऐसा तारा है जो पृथ्वी के निकट है , इसलिए वैज्ञानिक बरसों से सूरज से निकलने वाली ध्वनि को रिकार्ड करने की तरकीब खोज रहे थे , और आखिर में उनको सफलता मिल गई

सभी भली भांति जानते हैं कि सूर्य एक तारा (Star ) है , जो पृथ्वी से 93,000,000 मील दूर है , और अपनी धुरी पर तेजी से घूमता रहता है , सूर्य सदा जलता रहता है जिसकी अग्नि की ज्वालाएं हजारों किलो मीटर ऊंची हो जाती हैं , सूर्य की गरमी से ही पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व है , क्योंकि सूर्य के आसपास अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं है ,इसलिए आजतक वैज्ञानिक सूर्य से किसी प्रकार की ध्वनि निकलने की संभावना को सिरे से नकार देते थे ,

परन्तु जब नासा ( Atmospheric Imaging Assembly (AIA) ) ने 11 फरवरी सन 2011 को Solar Dynamics Observatory (SDOके द्वारा सूर्य से निकलने वाली चुम्बकीय तरंगों को ध्वनि में रूपांतरित किया तो वह सूर्य से निकलने वाली ध्वनि को सुन कर भौंचक्के रह गए ,क्योंकि सूर्य से लगातार ॐ की ध्वनि निकल रही थी ,जो स्पष्ट सुनाई दे रही थी .

वैज्ञानिकों को इस बात की अनेकों बार जांच की और 4 साल तक विभिन्न प्रकार के परीक्षण के बाद दिनांक 23 अक्टूबर 2014 को इस सत्य की पुष्टि कर दी , कि सूर्य से सचमुच ओम ध्वनि अनवरत निकलती रहती है , आप भी सूर्य की ध्वनि सुनिए ,

ओम ध्वनि | ॐ ध्वनि | Meditation | Om Sound |

इसीलिए ही भारत के सभी धर्मों में ॐ शब्द को पवित्र माना जाता है , उदहारण के लिए ,
1-हिन्दू धर्म में ओम ध्वनि
” तस्य वाचक प्रणवः “
अर्थात उस ईश्वर का वाचक ॐ ही है
योग दर्शन -समाधि पाद 1:27
2-गीता में ॐ का उल्लेख
ॐ तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः ।
ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिताः पुरा॥ (17:23


भावार्थ : सृष्टि के आरम्भ से “ॐ” (परम-ब्रह्म), “तत्‌” (वह), “सत्‌” (शाश्वत) है .और इन तीन अक्षरों( अ +उ +म ) के ब्रह्म को ब्राह्मण यज्ञ में मन्त्रों में स्मरण करते हैं ,और इसी का उच्चारण करते हैं .(17:23 )
3-बौद्ध धर्म में ॐ
जो लोग बौद्धों को नास्तिक कहते हैं ,उन्हें पता होना चाहिए कि हिन्दुओं की तरह तिब्बत के बौद्ध भी ॐ का जप करते हैं ,उनका मूल मन्त्र यह है ,आश्चर्य की बात यह है कि जब तिब्बत के बौद्ध यह मन्त्र बोलते हैं तो उस से वैसी ही ध्वनि निकलती है जैसी सूर्य से निकलती है

ॐ मणि पद्मे हुं
Om Mani Padme Hum (Tibetan)
आश्चर्य की बात यह है कि जब तिब्बत के बौद्ध यह मन्त्र बोलते हैं तो उस से वैसी ही ध्वनि निकलती है जैसी सूर्य से निकलती है
4-जैन धर्म में ॐ
इसी तरह लोग अज्ञानवश जैनों को भी नास्तिक या अनीश्वरवादी कह देते है , लेकिन जैन ग्रंथों में भी ॐ की महिमा वर्णित है देखिये
“अरिहंता ,असरीरा ,आयरिया ,उवझ्झाय ,मुणीणो ,पंचख्खर निप्पणो ,ओंकारो पंच परमिठ्ठी “
अर्थ -अर्हत अशरीरी ,आचार्य ,उपाध्याय और मुनि ,इन पाँचों के प्रथम अक्षरों को मिला कर ॐ बनता है . जो इन पञ्च परमेष्ठी का वाचक और बीज मन्त्र है

समण सुत्तं -ज्योतिर्मुख ,गाथा 12 पृष्ठ 5
5-सिख धर्म में ओंकार
श्री गुरु ग्रन्थ साहब में भी सर्व प्रथम ओंकार यानि ॐ ही लिखा गया है ,
१ ओंकार सतनाम करता पुरख
आज हमारे सभी हिन्दू , बौद्ध ,जैन और सिख बंधुओं को वैज्ञानिकों द्वारा इस खोज पर प्रसन्नता होना चाहिए कि वह जिस ॐ शब्द का नित्य उच्चारण किया करते हैं वही ध्वनि सूर्य से निकलती रहती है , यानि सूर्य भी हमारी तरह ॐ का ही जप करता रहता है ,
भारत के इन चारों धर्मो को सच्चा सिद्ध करने के लिए इस से बड़ा और कौन से प्रमाण की जरूरत चाहिए ?

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