Govardhan Puja 2020: जानिए कब, क्यों और कैसे

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Govardhan Puja, Govardhan Puja 2020
Govardhan Puja 2020: जानिए कब, क्यों और कैसे

Govardhan Puja:- गोवर्धन पूजा 15 नवंबर को रविवार के दिन की जाएगी, गोवर्धन पूजा मुहूर्त दोपहर 3:19 से शाम 5:27 तक रहेगा। गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन मनाया जाता हैं। इस दिन खासतौर पर अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है

गोवर्धन पूजा 2020
गोवर्धन पूजा 2020

गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है

हिंदू धर्म में दिवाली के अगले दिन Govardhan Puja की जाती है। हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है इस दिन बलि पूजा अन्य कोर्ट और माल पाली उत्सव भी मनाया जाता है यह दिन उत्तर भारत को लेकर साउथ इंडिया तक बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है Govardhan Puja गोधन मतलब गायकी पूजा की जाती है

हिंदू मान्यता के अनुसार गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है जिस तरह देवी लक्ष्मी सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी तरह गौ माता हमें स्वास्थ्य रूपी खाना प्रदान करते हैं इस दिन लोग अपने घर के आंगन में गाय के गोबर से एक पर्वत बनाकर उसे जल मौली रोली चावल फुल दही और तेल का दीपक जलाकर उसकी पूजा करते हैं

इसके बाद गोबर से बने पर्वत की परिक्रमा लगाई जाती है इसके बाद ब्रज के देवता कहे जाने वाले गिरिराज भगवान को प्रसन्न करने के लिए अन्नकूट का भोग लगाया जाता है Govardhan Puja का सीधा संबंध भगवान कृष्ण कहा जाता है इस त्यौहार की शुरुआत द्वापर युग में हुई थी हिंदू मान्यता के अनुसार गोवर्धन पूजा से पहले ब्रजवासी भगवान इंद्र की पूजा किया करते थे

Govardhan Puja 2020
Govardhan Puja kyun mnaya jata hai

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मगर भगवान कृष्ण के कहने पर 1 वर्ष ब्रिज वासियों ने गाय की पूजा की और गाय का गोबर का पहाड़ बनाकर उसकी परिक्रमा की तब से हर वर्ष किया जाता है ब्रज वासियों ने भगवान इंद्र की पूजा करनी बंद कर दी तो इस बात से नाराज हो गए और उन्होंने ब्रज वासियों डराने के लिए पूरे ब्रज को बारिश के पानी में जलमग्न कर दिया लोग प्राण बचाने के लिए भगवान कृष्ण के पास पहुंचे और भगवान कृष्ण में ब्रज वासियों को बचाने के लिए पूरा गोवर्धन पर्वत को अपने कानी उंगली पर उठा लिए लगातार 7 दिन तक भगवान कृष्ण ने ब्रज वासियों को उसी गोवर्धन पर्वत के नीचे सरण देकर उनके प्राणों की रक्षा की भगवान ब्रह्मा ने जब इंद्र को बताया कि भगवान कृष्ण विष्णु का अवतार हैं तो इस बात को जानकारी इंद्र बहुत पछताए और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी इंद्र का क्रोध खत्म होते ही

Govardhan Puja 2020, गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है
Govardhan Puja 2020: गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है

भगवान कृष्ण ने सातवें दिन गोवर्धन पर्वत नीचे रखकर बृज वासियों को आज्ञा दी की आगे से प्रतिवर्ष मुस पर्वत की पूजा करेंगे और अन्नकूट का उन्हें भोग लगाएंगे तो तब से लेकर आज तक गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर घर में मनाया जाता है अन्नकूट इस शब्द का अर्थ होता है अन का समूह यानी कि बहुत प्रकार के अन्य को समर्पित और वितरित करने के कारण ही इस उत्सव पर्व को अन्नकूट कहा जाता है इस दिन अनेक प्रकार के पकवान मिठाई से भगवान को भोग लगाया जाता है या यह कहें कि भगवान को 56 भोग लगाया जाता है 56 तरह के अनुष्ठान और पकवान भगवान के लिए बनाए जाते हैं

इस दिन खासतौर पर अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है इस दिन धन दौलत गाड़ी अच्छे मकान के लिए कृष्ण जी या मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है ताकि नौकरी या व्यापार में खूब तरक्की मिल सके तो दिवाली के अगले दिन की जाती है यह गोवर्धन पूजा और जैसा कि हमने आपको बताया घर के आंगन में गाय के गोबर से एक पर्वत बनाया जाता है और उस पर जल, मौली, रुली चावल, फूल दही तेल का दीपक जलाकर उसकी पूजा की जाती है और उस पूजा के बाद ही गोबर से बने इस पर्वत की परिक्रमा लगाई जाती है और उसके बाद ब्रज के देवता कहे जाने वाले गिरिराज भगवान जनान्नकुट का भोग लगाया जाता है

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Govardhan Puja कैसे मनाया जाता है

Govardhan Puja के लिए सामग्री

  • गाय का गोबर
  • लक्ष्मी पूजन वाली थाली, बड़ा दीपक, कलश व बची हुई सामग्री काम में लेना शुभ मानते है।
  • रोली , मौली, अक्षत
  • फूल माला, पुष्पबिना उबला हुआ दूध ।
  • 2 गन्ने, बताशे, चावल, मिट्टी का दीया
  • जलाने के लिए धूप, दीपक,अगरबत्ती
  • नैवेद्य के रूप में फल, मिठाई आदि अर्पित करें।
  • पंचामृत के लिए दूध, दही, शहद, घी और शक्कर
  • भगवान कृष्ण की प्रतिमा

इस दिन प्रातःकाल शरीर पर तेल की मालिश के बाद स्नान करने का प्रावधान है उसके बाद पूजन सामग्री के साथ पूजा स्थान पर बैठे और कुलदेव का ध्यान करें पूजा के लिए गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं इसे लेटे हुए पुरुष की आकृति में बनवाया जाता है फूल पत्ती और टहनियों व गायों के आकृतियों से या अपनी सुविधा अनुसार उस आकृति को सजाएं और उनके मध्य में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रखें नाभि का स्थान पर एक एक कटोरी जितना गड्ढा बना ले और वहां एक कटोरी मिट्टी का दीपक रखें फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे आदि पूजा करने के समय डाल दीजिए जाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांट देते हैं अब इस मंत्र को पढ़ें

“गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।

विष्णुबाहु कृतोच्छाय गवां कोटिप्रभो भव ॥”

इसके बाद गायों को स्नान कराएं और उन्हें सिंदूर आदि से सजाएं उनकी सिंगा में घी लगाएं और गुड़ खिलाए और फिर इस मंत्र का उचचारण करें

“लक्ष्मीर्या लोक पालानाम् धेनुरूपेण संस्थिता।

घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु ॥”

नए वैद्य के रूप में फल मिठाई आदि अर्पित करें गन्ना चढ़ाएं 1 कटोरी दही नाभि स्थान में डालकर बिलोने से झड़ते हैं और गोवर्धन के गीत गाते हुए गोवर्धन के सात बार परिक्रमा करते हैं परिक्रमा के समय एक व्यक्ति हाथ में जल का लोटा व अन्य जवो लेकर चलते हैं लूटल लिए हुए व्यक्ति परिक्रमा करते समय पानी का धारा गिराते हुए चलता है और बाकी के लोग जॉब होते हुए चलते हैं

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