अमरनाथ यात्रा की जानकारी, गुफा, रहस्य और कैसे हुई खोज

अमरनाथ यात्रा की जानकारी ओर उसके रहस्य ऐसे हैं जिसका तर्कित तौर पर सिद्ध कर पाना न तो इंसान के वश का है न विज्ञान के। भगवान शिव को समर्पित यह गुफा 12,756 फीट की उंचाई पर स्थित है। अमरनाथ की यह पवित्र गुफा श्रीनगर से 141 किमी दूर है। गुफा लगभग 150 फीट क्षेत्र में फैली हुई है और इसकी ऊंचाई करीब 11 मीटर है। इस पवित्रित् गुफा की खोज सोलहवीं शताब्दी के आस पास हुई है। इस गुफा की जानकारी कश्मीर का इतिहास बताने वाली किताब राजतंरगणी में भी किया गया हैं।

पवित्र अमरनाथ यात्रा कहाँ है?

अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में १३५ सहस्त्रमीटर दूर समुद्रतल से १३,६०० फुट की ऊँचाई पर स्थित है। गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) १९ मीटर और चौड़ाई १६ मीटर है।

अमरनाथ यात्रा के लिए कैसे जाया जाता है?

सड़क के रास्ते अमरनाथ पहुंचने के लिए पहले जम्मू तक जाना होगा, फिर जम्मू से श्रीनगर तक का सफर करना होगा। श्रीनगर से आप पहलगाम या बालटाल पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग- पहलगाम से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उधमपुर है जो करीब 217 किलोमीटर दूर है। हवाई मार्ग- पहलगाम से अमरनाथ की पैदल चढ़ाई शुरु होती है और पहलगाम से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट श्रीनगर में है जो करीब 90 किलोमीटर दूर है। इन दो स्थानों से ही पवित्र यात्रा की शुरुआत होती है। श्रीनगर से पहलगाम करीब 92 किलोमीटर और बालटाल करीब 93 किलोमीटर दूर है।

अमरनाथ धाम का रहस्य

भगवान शिव ने अमर कथा सुनाने से पहले अपनी कई चीजों को रास्ते में छोड़ दिया था। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए प्राय: पहलगाम वाला रास्ता सबसे ज्यदा प्रचलित है। लेकिन अमरनाथ की गुफा तक पहुंचने के लिए एक और मार्ग सोनमार्ग बालटाल मार्ग से भी जाया जा सकता है। लेकिन पौराणिकि कथाओं के मुताबिकि भगवान शिव ने गुफा तक पहुंचने के पहलगाम वाला मार्ग चुना था।

अमरनाथ धाम शिवलिंग से जुड़ा अद्भुद सच:

अमरनाथ यात्रा की जानकारी ओर रहस्य की बात की जाय तो सबसे पहले हमे अमरनाथ गुफा मे बने वाले शिवलिंग क बारे मे जान नया होगा। इस पवित्र गुफा में बनने वाले शिवलिंग या हिमलिंग के बनने की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। आज तक विज्ञान भी हिमलिंग के बनने की गुत्थी नहीं सुलझा पाई है। इस शिवलिंग का निर्माण गुफा की छत से पानी की बूंदों के टपकने से होता है। पानी के रुप में गिरने वाली बूंदे इतनी ठंडी होती है कि नीचे गिरते ही बर्फ का रुप लेकर ठोस हो जाती है। यह क्रम लगातार चलता रहता है और बर्फ का 12 से 18 फीट तक ऊंचा शिवलिंग बन जाता है।

जिन प्राकृतिक स्थितियों में इस शिवलिंग का निर्माण होता है वह विज्ञान के तथ्यों से विपरीत है। विज्ञान के अनुसार बर्फ को जमने के लिए करीब शून्य डिग्री तापमान जरुरी है लेकिन अमरनाथ यात्रा के समय इस स्थान का तापमान शून्य से उपर होता है।

ये भी पढे : अयोध्या के श्री राम और उन की वंशावली

अमरनाथ यात्रा की जानकारी और कबूतरों का रहस्य

महादेव भगवान शिव की इस अमरनाथ गुफा में बर्फ के शिवलिंग‌ के बाद कबूतरों के एक जोड़े की उपस्थिति भी एक तरह रहस्य है। कोई नहीं जाना कि ये जोड़ा कितना पुराना है। इस जोड़े के लेकर एक प्रसिद्ध कथा भी प्रचलित है। जब भगवान शिव पार्वती को अमरकथा सुना रहे थे तब उस गुफा में एक कबूतर का जोड़ा भी उपस्थित था जिसने वह पूरी कथा सुनी और हमेशा के लिए अमर हो गया।

माना जाता है कि आज भी इन दोनों कबूतरों का दर्शन भक्तों को यहां प्राप्त होता है। इस तरह से यह गुफा अमर कथा की साक्षी हो गई व इसका नाम अमरनाथ गुफा पड़ा।

अमरनाथ गुफा की खोज ओर इसके पीछे की कहानी

अमरनाथ गुफा
अमरनाथ गुफा मे शिवलिंग

16वीं सदी में इस गुफा की खोज हुई थी। गुफा की खोज को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं परंतु सबसे प्रचलित कहानी एक गड़रिये की है। घाटी में रहने वाले बूटा मलिक नामक एक मुस्लिम गड़रिये को किसी दिव्य पुरूष ने कोयले से भरा हुआ थैला दिया था। थैले को लेकर जब वह घर पहुंचा तो थैले में उसे कोयले के स्थान पर सोने के सिक्के मिले।खुशी के मारे वह दौड़ता हुआ उसी स्थान पर गया जहां उसे दिव्य पुरूष मिले थे। उस स्थान पर पहुंचकर बूटा मलिक को वह दिव्य पुरूष नहीं मिले परंतु यह गुफा और शिवलिंग मिला। इस खोज का श्रेय इस मुस्लिम गड़ेरिया को जाता है।

आज भी चढ़ावे का चौथाई उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है।

One thought on “अमरनाथ यात्रा की जानकारी, गुफा, रहस्य और कैसे हुई खोज

Leave a Reply